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जैन धर्म में नवकार मंत्र क्या है ?

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नवकार मंत्र में 9 पद होते हैं, इसलिए इसे नवकार कहा जाता है ।
नमस्कार मंत्र के 5 मुख्य पदों के कारण इसे पंच परमेष्ठी भी कहते हैं ।
नवकार मंत्र जैन धर्म का आदि मूल है इसे नमस्कार महामंत्र भी कहते हैं।

नमस्कार महामंत्र हि क्यों कहते है  ?

क्योंकि यह गुणो की पूजा करता है व्यक्तियों की नहीं।

णमोकार मंत्र इस प्रकार से है -

णमो अरिहंताणं

णमो सिद्धाणं

णमो आयरियाणं

णमो उवज्झायाणं

णमो लोए सव्व साहूणं

एसो पंच णमोक्कारो, सव्व पावप्पणासणो

मंगला णं च सव्वेसिं, पढमं हवई मंगलं

नवकार मंत्र

नवकार मंत्र का अर्थ क्या है ?

1. णमो अरिहंताणं - अरिहंतो को नमस्कार हो।

2.णमो सिद्धाणं - सिद्धो को नमस्कार हो ।

3.णमो आयरियाणं - आचार्यो को नमस्कार हो ।

4.णमो उवज्झायाणं - उपाध्यायो को नमस्कार हो ।

5.णमो लोए सव्व साहूणं - इस लोक के सभी साधु - साध्वियो को नमस्कार हो ।

6.एसो पंच णमोक्कारो - उपरोक्त जो पाँच नमस्कार योग्य पद है ।

7. सव्व पावप्पणासणो - वह समस्त पापो का नाश करने वाले है ।

8.मंगला णं च सव्वेसिं - ये समस्त पद मंगलदायी है ।

9.पढमं हवई मंगलं - जो भी इसे पढ़ेगा वह समस्त प्रकार सें मंगल फलदायी होगा ।

नवकार मंत्र में अरिहंत कौन है ?

ऐसी भव्य आत्माए जिन्होने अपने आठ घनघाती कर्मो में से चार का क्षय कर लिया ऐसी आत्माएं अरिहंत कहालाती है ।
उदाहरण - जैसे भगवान महावीर ने जब कैवलय ज्ञान कि प्राप्ती कि उस समय प्रभु ने अपने जन्म जंन्मातरो से चले आ रहे चार प्रमुख कर्म शत्रुओ का नाश कर दिया , और अरिहंत कहलाये । अरिहंत जैन धर्म में भगवान होते है ।

नवकार मे सिद्ध कौन होते है ?

ऐसी भव्य जीव आत्मा जिन्होंने अपने समस्त आठ कर्मो का नाश कर निर्वाण (मोक्ष) की प्राप्ती कि ऐसी मुक्त आत्माएं सिद्ध कहलाती है और उन्को नमस्कार नमो सिद्धांण के द्वारा किया जाता है ।


उदाहरण - भगवान महावीर ने जब मोक्ष कि प्राप्ती कि तब वह अपने समस्त कर्मो का नाश कर सिद्ध कहलाये । इसलिए पहले अरिहंत को नमस्कार करने के बाद नमो सिद्धांण आता है ।

नवकार मंत्र के बाकी पद क्रमशः 

णमो आयरियाणं
णमो उवज्झायाणं
णमो लोए सव्व साहूणं है 

प्रथम दो पद भगवान से संम्बिधत है , और बाकी तीन पद साधुओ से संम्बधित है ।

तीर्थंकर भगवान कि अनुपस्तिथी में आयरियाणं अर्थात जैन आर्चाय जैन धर्म के नायक होते है, जो धर्म का संचालन करते है ।

णमो उवज्झायाणं - उपाध्याय जी होते है जो विद्वान शास्त्रो के ज्ञाता होते है ।

णमो लोए सव्व साहूणं - इस लोक के जितने भी साधु - साध्वि है उन्को इस पद के द्वारा वंदना कि जाती है ।

नवकार मंत्र के शेष पद इन पदो कि महिमा का गुणगान करते है ।

नवकार मंत्र जैन धर्म का महामंत्र है, यह मंत्र सर्वमंगल दायी और शुभकारी होता है।
 
प्रत्येक कार्य को करने से पहले जैन मुनी और जैन श्रावको के द्वारा नवकार मंत्र का उच्चारण अवश्य हि किया जाता है ।

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