भगवान संभवनाथ जी

भगवान संभवनाथ जी जैन धर्म के तृतीय तीर्थंकर थे । इनके पिता का नाम जितारी था तथा माता का नाम सुसेना था , प्रभु का जन्म मार्गशीर्ष चतुर्दशी को हुआ था । प्रभु संभवनाथ कि जन्मभूमी श्रावस्ती थी । इनकी देह का रंग सुनहरा था , तथा इन्का प्रतीक चिह्न घोडा था ।

प्रभु संभवनाथ
तृतीय तीर्थंकर श्री संभवनाथ जी

भगवान संभवनाथ जी के शरीर का आकार 400 धनुष था यानी की लगभग 1200 मीटर ( जैन शास्त्रानुसार देह का प्रमाण ) भगवान संभवनाथ जी कि कुल आयु 60,000,00 पूर्व की थी ,  
भगवान संभवनाथ जी के यक्ष का नाम त्रिमुख तथा यक्षिणी का नाम प्रज्ञप्तिदेवी था ।

प्रभु को जन्म से ही तीन ज्ञान ( श्रृतज्ञान , मतिज्ञान, अवधिज्ञान ) था । भगवान संभवनाथ जी ने जब दीक्षा ग्रहण की तभी प्रभु को मनः पर्व ज्ञान की प्राप्ती हुई । प्रभु के चार घनघाती कर्मो का क्षय होने पर प्रभु को कैवलय ज्ञान की प्राप्ती हुई थी और प्रभु अरिहंत कहलाये ।

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भगवान संभवनाथ जी ने सम्मेद शिखरजी मे अपने समस्त घनघाती कर्मो का क्षय कर निर्वाण प्राप्त किया और सिद्ध कहलाये । प्रभु का निर्वाण चैत्र सुदी 6 को हुआ था । भगवान संभवनाथ जी के प्रथम शिष्य का नाम चारूदत तथा प्रथम शिष्या का नाम श्यामा था । प्रभु के प्रथम गणधर चारूजी थे ।


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