Bhaktamar Stotra Shloka-19 With Meaning

Abhishek Jain
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Bhaktamar Stotra Shloka-19 With Meaning 

भक्तामर स्तोत्र जैन धर्म का महान प्रभावशाली स्तोत्र है । इस स्तोत्र की रचना आचार्य मानतुंग ने की थी । इस स्तोत्र की रचना संस्कृत भाषा में हुई थी , जो इस स्तोत्र की मूल भाषा है, परन्तु यदी आपको संस्कृत नही आती तो आपकी सुविधा के लिए Bhaktamar Stotra के श्र्लोको (Shloka) को हमने मूल अर्थ के साथ - साथ हिन्दी में अनुवादित करते हुये उसका अर्थ भी दिया है , साथ हि साथ जिन लोगो को English आती है और संस्कृत नही पढ सकते वह सधार्मिक बंधु भी English मे Bhaktamar stotra का पाठ कर सकते है । इस प्रकार से Bhaktamar Stotra Shloka-19 With Meaning की सहायता से आप आसानी से इस स्तोत्र का पाठ कर सकते है ।

चाहे भाषा कोई भी हो हमारी वाणी से श्री आदीनाथ प्रभु का गुणगाण होना चाहिए । नित्य प्रातः काल मे पूर्ण शुद्धता के साथ श्री भक्तामर स्तोत्र का पाठ अवश्य करें ।

Bhaktamar Stotra Shloka-19

Bhaktamar Stotra Shloka - 19

जादू-टोना-प्रभाव नाशक

(In Sanskrit)

किं शर्वरीषु शशिनान्हि विवस्वता वा,

युष्मन्मुखेन्दु-दलितेषु तमःसु नाथ ।

निष्पन्न-शालि-वन-शालिनी जीव-लोके,

कार्यं कियज्-जलधरैर्जल-भारनम्रैः ॥19॥

(In English)

kim sharvarishu shashinaahni vivasvata va

yushmanmukhendu - daliteshu tamassu natha

nishmanna shalivanashalini jiva loke

karyam kiyajjaladharair - jalabhara namraih || 19 ||

Explanation (English)

O God ! Your aura dispels the perpetual darkness. The 

sun beams during the day and the moon during the night, 

but your ever radiant face sweeps away the darkness of 

the universe. Once the crop is ripe what is the need of 

the cloud full of rain.

(हिन्दी में )

निश-दिन शशि रवि को नहिं काम, तुम मुख-चंद हरे तम-धाम |

जो स्वभाव तें उपजे नाज, सजल मेघ तें कौनहु काज ||१९||

(भक्तामर स्तोत्र के 19 वें श्लोक का अर्थ )

हे स्वामिन्! जब अंधकार आपके मुख रुपी चन्द्रमा के द्वारा नष्ट हो जाता है तो रात्रि में चन्द्रमा से एवं दिन में सूर्य से क्या प्रयोजन? पके हुए धान्य के खेतों से शोभायमान धरती तल पर पानी के भार से झुके हुए मेघों से फिर क्या प्रयोजन |


" भगवान ऋषभदेवजी की जय "


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