सुमतिनाथ जी

प्रभु सुमतिनाथ जी जैन धर्म के 5वें तीर्थंकर है। प्रभु का जन्म चैत्र शुक्ल एकादशी को काम्पिलय नामक नगर मे हुआ था ।
प्रभु के पिता का नाम मेघरथ तथा माता का नाम सुमंगला था । 
प्रभु की देह का रंग स्वर्ण के समान पीला था ।

प्रभु सुमतिनाथ जी
प्रभु सुमतिनाथ जी

प्रभु की आयु 40,00,000 पूर्व की थी । प्रभु के शरीर की ऊंचाई 300 धनुष (900 मीटर ) थी । प्रभु का प्रतीक चिह्न चकवा पक्षी है । 
प्रभु ने वैशाख शुक्ल नवमी के दिन पूर्वाह्न काल मे 1000 राजाओ के साथ दीक्षा ली थी । प्रभु के साधनाकाल की अवधी 20 वर्ष थी । इसके पश्चात् चैत्र शुक्ल दशमी के दिन प्रभु को निर्मल कैव्लय ज्ञान की प्राप्ती हुई और वह केवली , जिन , अरिहंत कहलाये ।
इसके बाद प्रभु ने चार तीर्थो की स्थापना की और तीर्थंकर कहलाये । प्रभु सुमतिनाथ जी के 116 गणधर थे । 
इसके पश्चात् प्रभु ने चैत्र शुक्ल एकादशी को मघा नक्षत्र में सम्मेद शिखर जी में निर्वाण प्राप्त किया । प्रभु ने अपने समस्त घनघाती कर्मो का क्षय कर अक्षय अमर पद प्राप्त किया और सिद्ध प्रभु कहलाये । 
" प्रभु सुमतिनाथ जिनेन्द्र प्रभु की जय "

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