तीर्थंकर अनंतनाथ जी का जीवन परिचय

प्रभु अनंतनाथ जी जैन धर्म के 14वें तीर्थंकर है । प्रभु अनंतनाथ का जन्म ज्येष्ठ कृष्ण द्वादशी के दिन अयोध्या नगरी में इक्ष्वाकु कुल में हुआ था । प्रभु अनंतनाथ जी के पिता का नाम सिंहसेन तथा माता का नाम सुयशा था । प्रभु की देह का वर्ण स्वर्ण और इनका प्रतिक चिह्न सेही था ।

प्रभु अनंतनाथ जी की आयु 30,00,000 वर्ष थी । प्रभु के देह की ऊंचाई 50 धनुष थी । भगवान अनंतनाथ ने ज्येष्ठ कृष्ण चतुदर्शी के दिन गृह त्याग कर दीक्षा ग्रहण की, प्रभु का साधना काल दो वर्ष का था । दो वर्ष पश्चात चैत्र कृष्ण अमावस्या के दिन प्रभु को निर्मल कैवलय ज्ञान की प्राप्ती हुई । प्रभु पाँच ज्ञान के धारक हो गये , इसके पश्चात प्रभु ने साधु, साध्वी व श्रावक, श्राविका नामक चार तीर्थो को स्थापित किया और चार तीर्थो की स्थापना करने के कारण स्वयं तीर्थंकर कहलाये ।

प्रभु अनंतनाथ के समसवरण में 50 गणधर थें । प्रभु ने चैत्र कृष्ण अमावस्या के दिन सम्मेद शिखरजी से मोक्ष प्राप्त किया ।

" प्रभु अनंतनाथ जी की जय "

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" जय जिनेन्द्र "

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