​श्री गौतमस्वामी स्तोत्र | Shri Gautam Swami Stotra with Hindi & English Meaning

श्री गौतमस्वामी जी स्तोत्र | Shri Gautam Swami Stotra

The Most Powerful Hymn for Wealth, Wisdom, and Success

श्री गौतम स्वामी जी जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर प्रभु महावीर स्वामी जी के प्रथम गणधर थे। वे लब्धियों के भंडार और विघ्नविनाशक माने जाते हैं। जैसे हिंदू धर्म में गणेश जी की पूजा प्रथम होती है, वैसे ही जैन धर्म में किसी भी मांगलिक कार्य से पहले गौतम स्वामी जी का स्मरण किया जाता है।

अवश्य पढ़ें: गौतम स्वामी जी का संपूर्ण जीवन परिचय

॥ श्री गौतमस्वामी स्तोत्र ॥

(आचार्य जिनप्रभ सूरी रचित)

ॐ नमस्त्रिजगन्नेतुर, वीरस्याग्रिमसूनवे ।
समग्रलब्धिमाणिक्य - रोहणायेन्द्रभूतये ॥ १ ॥

पादाम्भोजं भगवतो गौतमस्य नमस्यताम् ।
वशीभवन्ति त्रैलोक्यसम्पदो विगतापदः ॥ २ ॥

तव सिद्धस्य बुद्धस्य पादाम्भोजरजःकणः।
पिपर्ति कल्पशाखीव कामितानि तनूमताम् ॥ ३ ॥

श्रीगौतमाक्षीणमहानसस्य तव कीर्तनात् ।
सुवर्णपुष्पां पृथिवीमुच्चिनोति नरश्चिरम् ॥ ४ ॥

अतिशेषतरां धाम्ना, भगवन्! भास्करी श्रियम्।
अतिसौम्यतया चान्द्रीमहो ते भीमकान्तता ॥ ५ ॥

विजित्य संसारमायाबीजं मोहमहीपतिंम् ।
नरः स्यान्मुक्तिराजश्रीनायकस्त्वत्प्रसादतः ॥ ६ ॥

द्वादशांगीविधौ वेधाः श्रीन्द्रादिसुरसेवितः ।
अगण्यपुण्यनैपुण्यं तेषां साक्षात् कृतोऽसि यैः ॥ ७ ॥

नमः स्वाहापतिज्योतिस्तिरस्कारितनुत्विषे ।
श्रीगौतमगुरो ! तुभ्यं वागीशाय महात्मने ॥ ८ ॥

इति श्री गौतम! स्तोत्र मंत्र ते smaratoऽन्वहम् ।
श्री जिनप्रभसूरेस्त्वं, भव सर्वार्थ सिद्धये ॥ ९ ॥

स्तोत्र का सरल हिन्दी अर्थ:

1. तीनों लोकों के नाथ वीर प्रभु के प्रथम शिष्य और सभी लब्धियों (शक्तियों) के भंडार इन्द्रभूति (गौतम स्वामी) को नमस्कार है।

2. गौतम स्वामी के चरण कमलों को नमस्कार करने से तीनों लोकों की सम्पदा वश में हो जाती है और सारी आपदाएँ दूर हो जाती हैं।

3. आपके चरणों की धूल कल्पवृक्ष के समान भक्तों की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली है।

4. 'अक्षीण महानस' (कभी न खत्म होने वाला भंडार) लब्धि के स्वामी आपका कीर्तन करने से मनुष्य सुख-समृद्धि प्राप्त करता है।

5. हे भगवन! आपका तेज सूर्य से भी अधिक है और सौम्यता चंद्रमा से भी बढ़कर है।

6. आपकी कृपा से मनुष्य मोह रूपी राजा को जीतकर मोक्ष रूपी लक्ष्मी का स्वामी बन जाता है।

9. आचार्य जिनप्रभ सूरी कहते हैं कि जो इस स्तोत्र का नित्य स्मरण करता है, उसके सभी कार्य सिद्ध होते हैं।

English Translation & Significance

Shri Gautam Swami was the first and most prominent disciple (Gandhara) of Lord Mahavira. He is worshipped as the "Lord of Miraculous Powers" (Labdhis). Just as Lord Ganesha is invoked first in Hinduism, Jains invoke Gautam Swami before any ritual to remove obstacles.

"By chanting this hymn daily, one attains prosperity, mental peace, and spiritual growth. The dust of his feet is like a wish-fulfilling tree (Kalpavriksha) for his devotees."

Line-by-Line English Meaning:

1. Salutations to Gautam Swami (Indrabhuti), the first disciple of Lord Mahavira and the source of all divine powers.

2. By bowing to the lotus feet of Lord Gautam, one gains command over the wealth of the three worlds and overcomes all troubles.

3. The dust of your feet is like a wish-fulfilling tree (Kalpavriksha) that satisfies all the desires of living beings.

4. By praising you, the possessor of the inexhaustible treasure, a person attains gold-like prosperity and happiness.

5. O Lord! Your brilliance is more radiant than the Sun, and your calmness is more soothing than the Moon.

6. With your grace, one conquers the king of delusion (Moha) and becomes the master of the bliss of liberation.

9. Acharya Jinaprabha Suri says that whoever remembers this hymn daily will succeed in all their endeavors.

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