💎 क्या आप जानते हैं? महान विद्वान इंद्रभूति से 'गौतम स्वामी' बनने का रहस्य!
एक ऐसी शंका जिसने 4 वेदों के ज्ञाता को भगवान महावीर का शिष्य बना दिया...
इंद्रभूति गौतम (गौतम गणधर) तीर्थंकर महावीर के प्रथम गणधर (मुख्य शिष्य) थे। गौतम स्वामी जी को भगवान महावीर के निर्वाण के अगले दिन कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति 80 वर्ष की उम्र में हुई थी।
गौतम स्वामी जी ने विलाप करते-करते अपने दर्शन के प्रवाह को मोड़ा और प्रभु के निर्वाण (दीपावली) के अगले दिन ज्ञान की प्राप्ति की।
गौतम स्वामी जी की आयु 92 वर्ष थी, जिसमें से 12 वर्ष उन्होंने कैवल्य ज्ञान की अवस्था में बिताए थे। यह गौतम स्वामी जी की ही जिज्ञासा का परिणाम है कि हमें प्रभु महावीर की दुर्लभ वाणी प्राप्त हो सकी।
🙏 क्या आप नित्य श्री गौतमस्वामी जी स्तोत्र का पाठ करते हैं?
🌟 जन्म और प्रारंभिक जीवन
इनका जन्म मगध राज्य के गोब्बर गाँव में ब्राह्मण वसुभूति और माता पृथ्वी के घर हुआ था। उनका जन्म ईसा से 607 वर्ष पूर्व हुआ था। अपने गोत्र 'गौतम' से वे विश्व प्रसिद्ध हुए। उनके दो भाई अग्निभूति और वायुभूति भी महान विद्वान थे।
📖 गौतम स्वामी जी की अगाध विद्वत्ता
गौतम स्वामी जी सम्पूर्ण 14 विद्याओं में पारंगत, 4 वेदों के ज्ञाता, 6 वेदांग (शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरूक्त, छंद, ज्योतिष) तथा 4 उपांगों के विशेषज्ञ थे। वे एक प्रख्यात आचार्य थे जिनके पास 500 छात्र विद्या ग्रहण करते थे।
🤔 वह शंका जिसने जीवन बदल दिया
दीक्षा से पूर्व इंद्रभूति गौतम के मन में एक बड़ी शंका थी। भगवान महावीर के समवशरण में पहुँचते ही प्रभु ने उनकी शंका का समाधान क्षण भर में कर दिया।
गौतम स्वामी जी को शंका थी कि: "क्या आत्मा का वास्तव में अस्तित्व है?"
प्रभु महावीर के वचनों से प्रभावित होकर उन्होंने अपनी शंका त्यागी और उनके प्रथम शिष्य (गणधर) बने।
शुद्ध भावना के साथ पढ़ें:
गौतम ! मत प्रमाद करो (जैन भजन) 🎵
🔥 क्या आप जानते हैं बाकी 10 गणधरों के चमत्कार?
गौतम स्वामी जी के अलावा भगवान महावीर के 10 और प्रमुख शिष्य थे। उनके जीवन की कहानियाँ और भी अद्भुत हैं!
👉 यहाँ क्लिक करें: महावीर के सभी गणधरों का परिचय (Label: गणधर)
(इसे पढ़े बिना आपकी जैन धर्म की जानकारी अधूरी है!)