✨ क्या वास्तव में देवता होते हैं? जानें गणधर मौर्यपुत्र जी के जीवन का अनसुना रहस्य!
मौर्य सन्निवेश के काश्यप गोत्रीय ब्राह्मण से जैन शासन के ७ वें गणधर बनने की गाथा...
मौर्यपुत्र जी श्रमण भगवान महावीर के ७ वें गणधर थे। उन्होंने प्रभु महावीर के जीवनकाल में ही निर्वाण प्राप्त किया था। मौर्यपुत्र जी मौर्य सन्निवेश के काश्यप गोत्रीय ब्राह्मण थे। उनके पिता का नाम मौर्य और माता का नाम विजया देवी था।
मौर्यपुत्र जी ने 65 वर्ष की आयु में अपने 350 शिष्यों के साथ भगवान महावीर के चरणों में श्रमण दीक्षा स्वीकार की। इन्होंने 14 वर्ष तक छद्मस्थ भाव में रहकर कठोर तपस्या की।
79 वर्ष की अवस्था में उन्होंने **केवलज्ञान** प्राप्त किया। इसके उपरांत 16 वर्ष तक केवली पर्याय में रहकर उन्होंने धर्म की महान प्रभावना की और 95 वर्ष की आयु में भगवान के समक्ष ही सिद्ध, बुद्ध और मुक्त हुए।
❓ मौर्यपुत्र जी की शंका: क्या देवता होते हैं?
दीक्षा से पूर्व मौर्यपुत्र जी के मन में देवलोक और देवताओं के अस्तित्व को लेकर एक बड़ा संशय था। वे एक ज्ञानी ब्राह्मण थे, फिर भी प्रत्यक्ष प्रमाण चाहते थे।
मौर्यपुत्र जी को शंका थी कि: "क्या देवताओं का वास्तव में अस्तित्व होता है या नहीं?"
जब वे भगवान महावीर के समवशरण में पहुँचे, तो प्रभु ने तर्क और दिव्य ज्ञान से सिद्ध किया कि देवलोक और देवों की सत्ता सत्य है। इस समाधान के बाद मौर्यपुत्र जी ने अपनी शंका त्याग दी और मोक्ष मार्ग के राही बने।
🚩 भगवान महावीर के सभी ११ गणधरों का परिचय
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