Bhaktamar Stotra Shloka (All in One)
Complete Guide, Meaning, & 48 Shlokas Index
भक्तामर स्तोत्र क्या है ? इसकी रचना किसने की थी ?
भक्तामर स्तोत्र (bhaktamar stotra) जैन धर्म का महान प्रभावशाली स्तोत्र है। इस स्तोत्र की रचना आचार्य मानतुंग ने की थी। भक्तामर स्तोत्र की रचना राजा भोज की धार नगरी में हुई थी।
भक्तामर स्तोत्र में कितने श्लोक है ?
भक्तामर स्तोत्र में श्वेताम्बर मान्यतानुसार 48 श्लोक है, जैन धर्म की एक मान्यतानुसार भक्तामर स्तोत्र (bhaktamar stotra lyrics with meaning) में 44 श्लोक है।
भक्तामर स्तोत्र किस भाषा में है ?
मूलतः भक्तामर स्तोत्र आचार्य मानतुंग ने संस्कृत के बसंत तिलका छंद में लिखा था। यह स्तोत्र जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर श्री ऋषभदेव भगवान को समर्पित है। इसकी मूल भाषा संस्कृत है।
इन्हे भी देखें (Important Resources)
Bhaktamar Stotra 48 Gatha (Shloka Index)
श्री भक्तामर स्तोत्र का महत्व और पाठ विधि
श्री भक्तामर स्तोत्र महान मंगलदायक, सर्वविघ्न विनाशक, पापनाशक तथा सर्वसुखदायी है।
श्री भक्तामर स्तोत्र का पाठ प्रातः सुबह निश्चित ही करना चाहिए, प्रातः काल का समय भक्तामर स्तोत्र के लिए सबसे उत्तम होता है। सूर्योदय इसके पाठ का सबसे सही समय है।
अगर संस्कृत पढ़ सके तो सबसे अच्छा है, अगर संस्कृत नही पढ़ सकते तो यह हिन्दी पाठ पूर्ण श्रद्धा व विश्वास के साथ अवश्य पढ़ना चाहिए।
" जय जिनेन्द्र "
अगर कोई त्रुटी हो तो
' तस्स मिच्छामी दुक्कड़म '
